सौगंध

सौगंध


देश की रक्षा में बलि मैं,
प्राण भी दे सकता हूँ।
सौगंध है मुझको कई,
प्राण भी ले सकता हूँ।

टेढ़ी आँखों देखने की,
कोई हिमाकत जब करे।
फोड़ दूँ उन आँखों को,
रक्षा वतन की हम करें।

कसमें खाकर आया हूँ,
देश पर मिट सकता हूँ।
सौगंध है मुझको कई,
प्राण भी ले सकता हूँ।

कर्तव्य पथ पर कदम,
डिगने न पाए, भूल से।
चलते रहे काँटों के पथ,
बचकर रहें हर फूल से।

वीरों के बलिदान पर मैं,
शक नहीं कर सकता हूँ।
सौगंध है मुझको कई,
प्राण भी ले सकता हूँ।

हर पहर चौकन्ना रहें,
जीते उन बाधाओं से।
सीना हो फौलादों की,
डर नहीं विपदाओं से।

आए आँधी या कि तूफां,
मैं नहीं हिल सकता हूँ।
सौगंध है मुझको कई,
प्राण भी ले सकता हूँ।

इतनी ताकत है हमें,
सौ के बराबर एक हैं।
काल हैं दुश्मन के हम,
निज दोस्तों में नेक हैं।

एकता में बल है और,
तूफाँ से भी लड़ता हूँ।
सौगंध है मुझको कई,
प्राण भी ले सकता हूँ।

इंसान हूँ इंसानों का,
हर धर्म हो मालूम मुझे।
प्रहरी हूँ सीमा का मैं,
हर कर्म हो मालूम मुझे।

देश की अपनी सुरक्षा,
हर कदम कर सकता हूँ।
सौगंध है मुझको कई,
प्राण भी ले सकता हूँ।





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