तेरी मेरी दास्तां - दो दिलों की कहानी।

                         

तेरी मेरी दास्तां - दो दिलों की कहानी

दिल्ली की एक ठंडी सुबह थी। दिसंबर का महीना, लेकिन सूरज की हल्की किरणें कोहरे के बीच से निकलकर ज़मीन पर सुनहरी चादर-सी बिछा रही थीं। हवा में ठंडक थी, पर वही हवा चेहरे पर एक अलग ताजगी भी दे रही थी। सड़कों पर धीरे-धीरे भीड़ बढ़ रही थीकोई कॉलेज जा रहा था, कोई ऑफिस, तो कोई बाज़ार की ओर।

 

इसी हलचल के बीच, राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के पास, एक लड़का सड़क किनारे खड़ा था। उसका नाम था **अमित** उम्र करीब 24 साल। उसने नीली शर्ट और काले रंग की पैंट पहन रखी थी, साथ में कंधे पर एक बैग। चेहरा साधारण-सा, लेकिन आँखों में चमक और आत्मविश्वास की झलक। आज उसके लिए दिन खास था, क्योंकि उसे कनॉट प्लेस में एक बड़ी कंपनी में इंटरव्यू देने जाना था।

 

वह काफ़ी देर से ऑटो का इंतज़ार कर रहा था। कई ऑटो पहले ही भरे हुए निकल गए। तभी एक खाली ऑटो उसके सामने आकर रुका। अमित ने राहत की साँस ली और आगे बढ़ा।

 

उसी वक़्त पीछे से एक मधुर-सी आवाज़ आई,“भैया, रुको ज़राक्या ये ऑटो खाली है? मुझे भी जाना है।

 

अमित ने पलटकर देखा। और वहीं ठिठक गया।

 

वहाँ खड़ी थी—**सोनाली** करीब 22 साल की, लंबाई लगभग 5 फुट 5 इंच। उसने हल्का गुलाबी रंग का सूट पहन रखा था, बाल खुले थे, और हाथ में एक लैपटॉप बैग। उसके चेहरे पर मासूमियत और आत्मविश्वास का अद्भुत संगम था। बड़ी-बड़ी आँखें और होंठों पर हल्की-सी घबराई लेकिन प्यारी मुस्कान।

 

ऑटो वाला दोनों को देखने लगा, जैसे सोच रहा हो कि किसे बैठाए।

 

सोनाली ने अमित की ओर देखकर धीरे से कहा,“अगर आपको आपत्ति हो तोक्या मैं भी आपके साथ ऑटो शेयर कर सकती हूँ? मुझे भी कनॉट प्लेस ही जाना है।

 

अमित ने हल्की मुस्कान दी।जी हाँ, क्यों नहींबैठ जाइए।

 

सोनाली ने धन्यवाद कहा और बैग के साथ ऑटो में बैठ गई।

 

ऑटो धीरे-धीरे सड़क पर आगे बढ़ा। शुरू में दोनों चुप थे। सिर्फ़ ऑटो की खटर-पटर आवाज़ और सड़क का शोर सुनाई दे रहा था। अमित खिड़की से बाहर देखता रहा। मन में सोच रहा था, “ये लड़कीकितनी अलग है। जैसे ही सामने आई, एक अजीब-सी हलचल दिल में पैदा हुई। क्यों?”

 

उधर सोनाली भी सोच रही थी, “ये लड़का कितना विनम्र है। आजकल तो लोग अजनबी के साथ सफ़र करना पसंद ही नहीं करते, लेकिन इसने सहजता से जगह दे दी।

 

कुछ मिनट खामोशी में बीते। लेकिन फिर सोनाली ने ही बातचीत की शुरुआत की।

 

आप भी कनॉट प्लेस जा रहे हैं? कोई काम है वहाँ?” उसने संकोच तोड़ते हुए पूछा।

 

अमित ने उसकी ओर देखकर जवाब दिया,“हाँआज मेरा इंटरव्यू है। एक कंपनी में अप्लाई किया था। आप?”

 

सोनाली ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,“ओह! ऑल बेस्ट। मैं भी वहाँ पास के ऑफिस में काम करती हूँ। दरअसल, आज थोड़ी देर हो गई, इसलिए ऑटो लेना पड़ा।

 

अमित ने सर हिलाते हुए कहा,“अच्छातो आप पहले से वर्किंग हैं। बहुत अच्छा। कौन-सा ऑफिस?”

 

एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी है। जॉइन किए मुझे लगभग डेढ़ साल हो गया।

 

वाह, अच्छी बात है। आजकल तो करियर बनाने में समय ही लग जाता है।

 

दोनों धीरे-धीरे सहज हो गए। बातचीत का विषय बदलता रहादिल्ली की भीड़, ट्रैफिक जाम, मेट्रो की भीड़भाड़।

 

सोनाली हँसते हुए बोली,“आपको पता है, कभी-कभी तो लगता है कि दिल्ली की सड़कों पर गाड़ियाँ चलती कम हैं, रेंगती ज़्यादा हैं।

 

अमित ने भी हँसते हुए कहा,“सही कहा आपने। आज अगर ये ऑटो मिलता तो शायद मैं भी लेट हो जाता।

 

इस बीच ऑटो मंडी हाउस के पास से गुज़रा। हवा थोड़ी तेज़ हुई और सोनाली के खुले बाल उड़कर उसके चेहरे पर गए। उसने झट से बालों को पीछे किया। अमित कुछ पल के लिए बस उसे देखता रह गया। उसे खुद भी समझ नहीं आया कि क्यों वह इतनी देर तक उसकी ओर देख रहा था।

 

सोनाली ने अचानक पूछा, “वैसेअगर बुरा मानें तो क्या मैं आपका नाम  जान सकती हूँ?”

 

अमित जैसे ख्यालों से बाहर आया। अरे… नहीं, इसमें बुरा मानने की कौन सी बात है। मेरा नाम अमित है। और आपका?”

 

सोनाली।

 

दोनों ने मन ही मन एक-दूसरे का नाम दोहराया। जैसे अपने दिल में पक्का कर रहे हों कि अब ये नाम भूलना नहीं है।

 

थोड़ी देर तक फिर चुप्पी रही। लेकिन वह चुप्पी अब बोझिल नहीं थी, बल्कि प्यारी-सी थी। जैसे दोनों बिना शब्दों के भी बहुत कुछ कह रहे हों।

 

अमित ने मन ही मन में सोचा, “कितनी सहज है ये। कोई दिखावा नहीं, कोई बनावट नहीं। बस सीधी-सी, सच्ची।

 

सोनाली के मन में भी यही ख्याल आया, “ये लड़का दूसरों से अलग है। उसकी आँखों में ईमानदारी है।

 

कुछ ही देर में ऑटो कनॉट प्लेस पहुँचा। सोनाली पहले उतरने लगी, लेकिन अमित ने रोक दिया।

 

रुकिएमैं पेमेंट कर देता हूँ।

 

सोनाली ने हाथ हिलाते हुए कहा,“नहीं-नहीं, ऐसा कैसे? मैं भी हिस्सा दूँगी।

 

अमित ने मुस्कुराकर कहा,“अरे, पहली बार मिले हैं और आपसे पैसे लेनाअच्छा नहीं लगेगा।

 

सोनाली ने थोड़ा ज़ोर दिया, लेकिन फिर मान गई।

 

वह जाते-जाते ठहर गई। कुछ पल सोचती रही, फिर बोली,“अमितअगर आपको बुरा न लगे तोक्या मैं आपका नंबर ले सकती हूँ? कभी ज़रूरत पड़ जाए तो काम सके।

 

अमित कुछ पल चुप रहा। वह हैरान भी था और खुश भी। उसने नंबर दे दिया। सोनाली ने भी अपना नंबर उसे दे दिया।

 

ठीक है, अब चलती हूँ। और हाँ, आपके इंटरव्यू के लिए शुभकामनाएँ।

 

धन्यवाद, सोनाली। अपना ख्याल रखिएगा।

 

सोनाली मुस्कुराई और भीड़ में खो गई।

 

अमित वहीं खड़ा कुछ देर तक उसे जाता देखता रहा। दिल की धड़कनें जैसे तेज़ हो गई थीं। आज की यह मुलाक़ात उसके दिल पर गहरी छाप छोड़ गई थी।

 

वहीं सोनाली अपने ऑफिस पहुँची, लेकिन बार-बार उसका मन उस ऑटो की तरफ़ लौट रहा था। एक अजनबी से हुई मुलाक़ात इतनी सहज और इतनी मीठी कैसे हो सकती है?

 

दोनों ने अपने-अपने काम में लगने की कोशिश की, लेकिन दिल में कहीं कहीं **एक नया बीज** अंकुरित हो चुका था।

 

पहली बार की ऑटो यात्रा के बाद अमित और सोनाली अपनी-अपनी दुनिया में लौट तो गए थे, लेकिन मन वहीं अटका था। अजनबी होते हुए भी दोनों के बीच जो सहजता आई थी, उसने दिल में एक अलग-सी मिठास घोल दी थी।

 

अगले दिन सुबह-सुबह अमित अलार्म की आवाज़ पर उठा। इंटरव्यू सफलतापूर्वक निपट चुका था और उसे मन ही मन लग रहा था कि अब परिणाम भी सकारात्मक ही होगा। लेकिन असली उत्सुकता कहीं और थी।

 

क्या सोनाली मैसेज करेगी? या मुझे करना चाहिए?” — यह सवाल उसे बार-बार बेचैन कर रहा था।

 

आख़िरकार उसने हिम्मत जुटाई और व्हाट्सऐप खोला। नंबर सेव करते समय उसने नाम लिखा था — “Sonaliji (Auto wala din)”

उसने टाइप किया, “सुप्रभात सोनालीजी! कल का सफ़र यादगार रहा। उम्मीद है आप समय पर ऑफिस पहुँच गई होंगी

 

मैसेज भेजने के कुछ ही सेकंड में double blue tick हो गया। दिल की धड़कन तेज़ हो गई।

फिर स्क्रीन पर लिखा आया — "typing…"

 

सोनाली का जवाब— “सुप्रभात अमित! हाँ, बिल्कुलऔर आपको भी इंटरव्यू के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएँ। आप तो पहुँचे समय पर?”

 

अमित मुस्कुराया। यह पहला कदम था।

 

उस एक मैसेज ने दरवाज़ा खोल दिया। अब दोनों के बीच रोज़ थोड़ी-थोड़ी बातचीत होने लगी। सुबहगुड मॉर्निंगऔर रात कोगुड नाइटमैसेज का आदान-प्रदान।

 

कभी ट्रैफिक की बातें होतीं, कभी दिल्ली की भीड़भाड़ पर हल्की नोक-झोंक, तो कभी अपने बचपन के किस्से।

सोनाली अक्सर हँसते हुए इमोजी भेज देती और अमित सोचता

कितनी सहज है यहजैसे बरसों से जानता हूँ।

 

करीब 10 दिन बाद सोनाली ने अचानक मैसेज किया

अमित, आप फ्री हैं क्या? ऑफिस के पास एक नया कैफ़े खुला है। सोचा, कॉफ़ी पी जाए।

 

अमित की आँखें चमक उठीं। उसने तुरंत जवाब दिया

जी हाँ! आज ऑफिस से थोड़ा जल्दी निकल जाऊँगा। कहाँ मिलें?”

 

तेरी मेरी दास्तां - दो दिलों की कहानी


शाम को कनॉट प्लेस के एक सुंदर कैफ़े में दोनों मिले।

सोनाली ने नीले रंग की जींस और सफेद टॉप पहना था। खुले बाल और हल्की-सी मुस्कानअमित को फिर वही ऑटो वाला पल याद गया।

 

कॉफ़ी के प्यालों के बीच बातचीत का दौर शुरू हुआ।

सोनाली ने हँसते हुए पूछा,“तो मिस्टर इंटरव्यू, रिज़ल्ट का क्या हुआ?”

 

अमित ने मुस्कुराकर कहा,“हुआ ये कि मुझे नौकरी मिल गई।

 

सोनाली की आँखें चमक उठीं,“वाह! ये तो सेलिब्रेशन बनता है।

 

दोनों ने हँसते हुए केक ऑर्डर किया और छोटी-सी celebration वहीं कर डाली।

वो शाम दोनों के लिए बेहद खास थी।

 

अब अमित और सोनाली की मुलाक़ातें बढ़ने लगीं। कभी लंच ब्रेक में, कभी वीकेंड पर।

अमित का मन अब ऑफिस के काम से ज़्यादा सोनाली से बात करने में लगता।

सोनाली भी महसूस करने लगी थी कि अमित की संगत उसे सुकून देती है।

 

एक दिन पार्क में टहलते हुए सोनाली ने पूछा,“अमित, आपको लगता है कि अजनबी से इतनी जल्दी दोस्ती हो सकती है?”

 

अमित हल्के से मुस्कुराया,“मुझे तो लगता है कि कुछ लोग हमें अजनबी लगते ही नहींजैसे पहले से जुड़े हों।

 

सोनाली ने उसकी आँखों में झाँका और पलटकर बोली,“शायद आप सही कह रहे हैं।

 

हर रिश्ते की तरह, इनके बीच भी एक दिन मामूली सी खटास गई।

एक शाम सोनाली ने मैसेज किया, लेकिन अमित तत्काल रिप्लाई न कर पाया। उसने देर से रिप्लाई किया।।

सोनाली ने लिखा, “लगता है अब आप बिज़ी हो गए हैं। हमारी बातें अब बोझ लगती होंगी।

 

अमित को पढ़कर बहुत दुख हुआ। उसने तुरंत कॉल किया और समझाया

नहीं सोनाली, ऐसा मत सोचो। आज मीटिंग लंबी हो गई थी, इसलिए रिप्लाई लेट हुआ। तुम्हारी बातें मुझे कभी बोझ कैसे लग सकती हैं?”

 

सोनाली कुछ पल चुप रही, फिर बोली,“ठीक हैमाफ़ करना। पता नहीं क्यों, कभी-कभी डर लगता है कि कहीं आप दूर हो जाएँ।

 

अमित ने हल्की हँसी में कहा,“दूर? मैं? असंभव।

 

उस रात उनकी बातचीत पहले से ज़्यादा गहरी हो गई।

 

धीरे-धीरे दोनों का रिश्ता दोस्ती से आगे बढ़ रहा था। अमित ने कई बार चाहा कि वह अपने दिल कि बात कह दे, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पाता। एक दिन बारिश हो रही थी। दोनों इंडिया गेट के पास टहल रहे थे। हवा में ठंडक थी और बूंदें गालों को छू रही थीं। अमित ने अचानक कहा,“सोनाली, तुम्हें नहीं लगता कि ये बारिश हमें और करीब ला रही है?”

 

सोनाली ने हल्के से मुस्कुराते हुए उसकी आँखों में देखा।


शायद हाँया शायद मैं ही ज़्यादा सोच रही हूँ।

 

अमित कुछ कह पाता, उससे पहले ही सोनाली ने हाथ में गिरती बारिश की बूंदें पकड़ते हुए कहा,“पता है अमित, ज़िंदगी भी ऐसी बारिश जैसी हैअगर सही साथी हो तो हर बूंद खूबसूरत लगती है।

 

अमित ने उसी पल मन में तय कर लिया,  अब वक्त गया है… वह सोनाली से अपने दिल की बात कहेगा

 

उसने एक छोटी-सी प्लानिंग की। कनॉट प्लेस के उसी कैफ़े में, जहाँ उनकी दूसरी मुलाक़ात हुई थी, वह सोनाली को बुलाएगा। टेबल पर फूल रखेगा और एक कार्ड जिसमें लिखा होगा, “क्या तुम मेरी ज़िंदगी का हिस्सा बनोगी?”

 

दिल की धड़कनें तेज़ थीं। वो बार-बार सोच रहा था, “क्या होगा अगर उसने मना कर दिया? लेकिन अगर हाँ कह दिया तो…”

 

साँझ की हल्की ठंडी हवा बह रही थी। आसमान में ढलते सूरज की सुनहरी आभा बिखरी हुई थी। पार्क के उस कोने में, जहाँ पेड़ों की छाँव और थोड़ी सी शांति थी, वही जगह अमित ने चुनी थी। उसके हाथ थोड़े काँप रहे थे, लेकिन चेहरे पर एक उम्मीद झलक रही थी।

 

सोनाली आई, अपनी वही सहज मुस्कान के साथ।

तो, इतनी अचानक बुलाने का क्या राज़ है?” उसने मज़ाकिया अंदाज़ में पूछा।

 

अमित ने गहरी साँस ली, और जेब से छोटा-सा डिब्बा निकाला।

राज़ ये हैकि मैं अब और छुपा नहीं सकता।उसकी आवाज़ धीमी थी, लेकिन भावनाओं से भरी हुई।

 

सोनाली थोड़ी चौंक गई। उसकी आँखें अमित के हाथ में पकड़े डिब्बे पर टिक गईं।

अमित एक घुटने पर बैठ गया, और उसकी आँखों में सीधे देखते हुए बोला,“सोनाली, तुमसे मिलने के बाद मुझे समझ आया कि जिंदगी सिर्फ जीने का नाम नहीं, बल्कि महसूस करने का नाम है। मैं हर लम्हा तुम्हारे साथ जीना चाहता हूँ। क्या तुममेरी जिंदगी का हिस्सा बनना चाहोगी?”

 

कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया। हवा जैसे थम गई हो। सोनाली के चेहरे पर मुस्कान और हल्की झिझक दोनों थी। उसकी आँखें नमी से चमक रही थीं।

 

वह धीरे-धीरे बोली,“अमितमैंने कभी सोचा नहीं था कि तुम इतनी सीधे-सीधे ये कह दोगे। लेकिनहाँ, शायद यही सच है कि तुमने मेरे दिल को छू लिया है। और अगर तुम्हारे साथ रहना मेरी किस्मत हैतो मुझे इससे ज़्यादा खुशी और कुछ नहीं।

 

अमित की आँखों में चमक गई। उसने अंगूठी उसकी उँगली में पहनाई और दोनों ने उस पल को चुपचाप महसूस किया।

 

मंडप में शहनाई गूंज रही थी। चारों ओर रोशनी और फूलों की खुशबू फैली हुई थी। रिश्तेदार हँसी-मज़ाक में डूबे थे। लेकिन भीड़ के बीच अमित और सोनाली की निगाहें सिर्फ़ एक-दूसरे को ढूँढ रही थीं।

 

सोनाली ने नज़रें झुका रखी थीं। चेहरे पर लाज थी, लेकिन आँखों में वही आत्मविश्वासजिससे उसने अमित के साथ यह सफ़र तय किया था।

तेरी मेरी दास्तां - दो दिलों की कहानी


अमित धीरे से उसके पास झुका और फुसफुसाया,“याद है वो दिन जब मैंने तुमसे कहा था, मेरी ज़िंदगी का हिस्सा बन जाओ? आज लगता है, मेरी पूरी दुनिया ही तुम बन गई हो।

 

सोनाली ने धीमे से मुस्कुराकर जवाब दिया,“और याद है मैंने क्या कहा था? अगर तुम्हारे साथ रहना मेरी किस्मत है, तो मुझे इससे ज़्यादा खुशी और कुछ नहींआज वही पल सच हो गया है।

 

पंडित जी ने मंत्र पढ़ते हुए सात फेरे शुरू कराए। हर फेरे के साथ, जैसे उनकी यादें भी आँखों के सामने गुज़रने लगींपहली मुलाक़ात, दोस्ती, अमित का प्रपोज़ल, सोनाली की झिझक, परिवार की नाराज़गी और फिर सबका धीरे-धीरे पिघलना। आख़िरी फेरे के बाद, जब अमित ने माँग में सिंदूर भरा, तो सोनाली की आँखों से आँसू छलक पड़े। यह आँसू दुख के नहीं, बल्कि उस सफ़र की गवाही थे जिसे दोनों ने साथ मिलकर पूरा किया था। 


दोनों ने हाथ थामे और भीड़ के बीच मुस्कुराए। तालियों और बधाइयों की गूँज के बीच, जैसे पूरी दुनिया ठहर गई थी। 


उस पल सिर्फ़ एक सच्चाई थी


**दो दिल अब हमेशा के लिए एक हो चुके थे।**


 

 

 

 

 

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