मैंने रंग दी है नंद के लाल, बँसुरिया कैसे
बजे-२ लाल रंग डाला, हरित रंग डाला । डाला अबीर
गुलाल। बँसुरिया कैसे
बजे-२ बरसाने में
राधा के संग बरजोरी, करते हैं
कान्हा कमाल । बँसुरिया कैसे
बजे-२ यमुना के तट
जा पहुँचे कन्हैया, बैठ गए कदम्ब
के डाल । बँसुरिया फिर से बजे-२
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