द्वंद मन का।


                                                            

द्वंद्व

एक द्वंद सदा रहता मन में,
उनसे हम बात करे न करें।
बचपन से ही बैरी हैं उनके,
अब शुरूआत करें न करें।


क्यों दर्द उन्हें होता है तब,
जब चाहत कोई पूरी न हो।
चाहत आहत होती उनकी, 
बेशक आघात करें न करें।


सबसे बड़ा मरहम वक्त है, 
उससे बड़ा नहीं कोई हुआ।
वक्त के आगे बेबस हैं हम,
फिर कोई बात करें न करें।


मन मलिन हो गया हो थोड़ा,
शक का समाधान भले न हो।
जो शंकित मन होवे किसी से,
फिर वह उत्पात करें न करें।


दामन कितना हो शुभ्र मगर,
दागदार होता है पल भर में।
दाग न मिटता है क्षण में वह,
बेशक प्रतिवाद करें न करें।


सुख दुःख आता है जीवन में, 
जीवन सुख दुःख का संगम है।
सुख से हर्षित मन होता रहता,
दुःख में अवसाद करें न करें।


हर कर्म द्वंद से पूरित है पर,
निर्णय खुद ही लेना पड़ता है। 
जब निर्णय भी गलत हो जाए,
तब हम अश्रुपात करें न करें।

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