आँखों में बसा है अक्स तेरा,
हर वक्त, हमारे दिल में तू है।
तुम्हें ढूँढा जहाँ, वहाँ न पाया,
मिलता नहीं महफिल में तू है।
हरदम गुमसुम तुम रहते हो,
क्या राज छुपा रखा सीने में।
तन्हा रहने का क्या मतलब,
जब आए मजा नहीं जीने में।
दु:ख तो इंसान के जीवन में,
आता है और चला जाता है।
खुश रहकर जीवन जिए जो,
दु:ख का पता न हो पाता है।
दु:ख तो जीवन की रेखा है,
गहरी होके हल्की हो जाती।
आती वह साथ में दर्द लिए,
जाती तब खुशियाँ दे जाती।
मन में विषाद फिर क्यों हो ,
जब कोई खुशी देता जाए।
दु:ख में द्रवित न होवे कभी,
सुख में, कभी नहीं भरमाए।
आओ अब चलके देखें कि
कैसी महफिल सज गई है।
आनंदित हो रही है दुनिया,
जहाँ में खुशियाँ बस गई है।
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