रात का समय था। बाहर तेज़ बारिश हो रही थी और रह-रहकर आसमान
में बिजली कौंध रही थी। बारिश की तेज बूँदों की आवाज़ इस अँधेरी रात को रहस्यमयी और
डरावनी बना रही थी। एक काले रंग की एक लग्ज़री कार धीरे-धीरे चलती हुई एक कैफ़े के
सामने आकर रुकी। कार का दरवाज़ा खुला, और अंदर से एक युवक बाहर निकला। वह आरव था, एक
मशहूर बिज़नेसमैन, जो अपनी तेज़-तर्रार सोच और सफलता के
लिए जाना जाता था।
उसने कैफ़े का दरवाजा खोला और अंदर कदम रखा। हल्की रोशनी, धीमी
संगीत और कॉफी की खुशबू अंदर के वातावरण को सुकून भरा बना रहा थी। वह काउंटर पर पहुँचा और
ब्लैक कॉफी का ऑर्डर देने ही वाला था कि उसकी नज़र कैफ़े के कोने की टेबल पर पड़ी।
वहाँ एक लड़की बैठी थी जो बारिश में पूरी तरह भीग चुकी थी, उसके भींगे
बाल उसके चेहरे पर आकर चिपक रहे थे। उसकी आँखों में और चेहरे पर एक अनकहा सा दर्द नजर आ
रहा था। उसने अपने हाथ में एक पुराना ख़त ले रखा था, जो
बारिश में पूरी तरह भीग चुका था। यह देखकर आरव को कुछ अजीब लगा।
आरव ने झिझकते हुए वह ख़त उठाया। बारिश में भींगने से उसकी स्याही
धुंधली हो चुकी थी। उसने देखा उसपर लिखा था, "मुझे ढूँढ लेना, अगर तुम समझ
सको… - सिया।"
बिज़नेस की दुनिया का एक बड़ा नाम था आरव मल्होत्रा, जिसे लोग उसकी काबिलियत, मेहनत और सफलता के लिए
जानते थे। उसके लिए ज़िंदगी का मतलब था—काम और सफलता। वह अपनी व्यावसायिक जिन्दगी में इतना व्यस्त रहता था कि उसकी निजी ज़िंदगी में किसी के लिए कोई
जगह नहीं बची थी। प्यार और भावनाएँ उसके लिए बस किताबों की बातें थीं।
लेकिन उस बरसाती रात के बाद, उसकी सोच
में एक हलचल सी मच गई। जिस लड़की को उसने पहले कभी देखा नहीं, जिसे
वह जानता तक नहीं था, उसके बारे में सोचने से वह खुद को रोक
नहीं पा रहा था। वह लड़की कौन थी, कहाँ से आई थी? उसने ख़त पर सिर्फ़ अपना ही नाम क्यों लिखा था? उसका यह लिखना, "मुझे ढूँढ लेना, अगर तुम समझ सको… - सिया"—क्या एक इशारा था,
या फिर मदद की गुहार? आरव को यह सवाल परेशान
करने लगा था।
आरव ने कैफ़े के मालिक से बात करके पिछली रात की
रिकॉर्डिंग्स मँगवाईं। वह ध्यान से स्क्रीन पर नज़रें गड़ाए बैठा हर एक
मूवमेंट को गौर से देख रहा था।
लेकिन अजीब बात ये थी कि उस लड़की की कोई साफ़ फुटेज नहीं थी। जब भी कैमरा उसकी तरफ़ आता, या तो उसकी शक्ल साफ़
नहीं दिखती थी या फिर वह किसी परछाई में चली जाती।
आरव को यकीन नहीं हुआ। वह स्क्रीन पर झुका और फिर से
रिकॉर्डिंग देखी।
"ये कैसे हो सकता है?" उसने
खुद से सवाल किया।
कैफ़े में उसने खुद लड़की को देखा था, उसने उससे
नज़रें मिलाई थीं, लेकिन रिकॉर्डिंग में कोई पहचानने लायक
चेहरा नहीं था।
आरव ने अपने ऑफिस में बैठकर उस भीगे
हुए ख़त को एक बार फिर हाथ में लिया। उसने उसे कई
बार पढ़ा, जैसे कोई छिपा हुआ अर्थ निकालने की कोशिश कर रहा
हो।
"मुझे ढूँढ लेना, अगर
तुम समझ सको… - सिया"
आरव ने नाम को ज़ोर से दोहराया—"सिया..."।
उसकी ज़िंदगी में ऐसा कोई नाम कभी नहीं आया था। ना किसी
पुराने दोस्त के रूप में, ना किसी बिज़नेस कनेक्शन में। तो फिर, यह लड़की कौन थी? और सबसे बड़ा सवाल—अगर
वह चाहती थी कि आरव उसे ढूँढे, तो क्यों?
आरव के दिमाग़ में पहली बार कोई ऐसा सवाल था, जिसका
जवाब उसे अपनी ताक़त या पैसा नहीं दिला सकता था। उसे खुद ही इसे सुलझाना था। उस
अजनबी बरसाती रात के बाद, उसकी
ज़िंदगी में एक ऐसा सवाल आ खड़ा हुआ था जिसका जवाब उसके पास नहीं था—सिया कौन
थी?
ख़त में सिर्फ़ एक नाम और एक संदेश था। ना कोई पता, ना कोई
संपर्क सूत्र। लेकिन आरव ठान चुका था कि वह इस पहेली को हल करेगा। उसने अपने
नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए सिया की तलाश शुरू की।
आरव को जल्द ही समझ में आ गया कि अगर वह सिया को ढूँढना चाहता है, तो उसे आम तरीकों से अलग हटकर सोचना होगा। वह मुंबई के NGOs और सोशल ऑर्गनाइज़ेशन्स तक पहुँचा, खासकर वे जो महिला तस्करी और ज़रूरतमंद महिलाओं के लिए काम करते थे। धीरे-धीरे, उसने कई लोगों से बातचीत किया। फिर, एक पुरानी NGO के वर्कर से एक महत्वपूर्ण सुराग मिला।
"सिया सिर्फ़ एक समाजसेविका नहीं थी। वह
उन लोगों के खिलाफ़ खड़ी थी जो ताकतवर थे—बहुत ताकतवर। शायद यही वजह थी कि उसने
खुद को छिपा लिया।"
आरव चौक गया।
"ताकतवर लोग? तुम
किसकी बात कर रहे हो?" उसने जल्दी से पूछा।
"कुछ बड़े नाम जिनके खिलाफ़ सिया ने आवाज़ उठाई थी। और जब उसे कुछ पता लगा, जिसे वह उजागर करना चाहती थी, तो चीज़ें बदल गईं। उसके बाद वह अचानक गायब हो गई।"
आरव अब तक इस खोज को सिर्फ़ एक रहस्यमयी लड़की की तलाश मान रहा था। लेकिन अब यह सिर्फ़ तलाश नहीं, बल्कि एक ख़तरनाक
साज़िश लग रही थी।
आरव अपने अपार्टमेंट की बालकनी में खड़ा था, जब उसके फोन की घंटी बजी। एक अनजान नंबर से कॉल आ रहा था। उसने कॉल उठाया।
"हेलो?"
फोन के दूसरी तरफ़ से एक जानी-पहचानी, लेकिन डरी हुई आवाज़ आई—"अगर सच में मुझे ढूँढना चाहते हो, तो कल रात मरीन ड्राइव पर आना।" आरव का दिल तेज़ी से धड़क उठा। यह सिया की आवाज़ थी।
उसने कुछ पूछना चाहा, लेकिन कॉल कट चुकी थी।
अगली रात, बिना किसी देरी के, आरव अपनी कार से मरीन ड्राइव पहुँच गया। चाँद की हल्की
रोशनी समुद्र की लहरों पर पड़ रही थी, और ठंडी हवा चल रही
थी। दूर सड़क किनारे, एक लड़की खड़ी थी—सिया।
वह घबराई हुई थी, बार-बार इधर-उधर देख रही थी, जैसे किसी से बचने की कोशिश कर रही हो। आरव ने उसकी ओर कदम बढ़ाए।
"सिया! तुम कहाँ थी? तुमने अचानक गायब होकर…"
उसने बीच में ही उसकी बात काट दी—"नहीं,
आरव! तुम यह सब मत जानो। तुम नहीं समझते, यह
बहुत ख़तरनाक है। मुझे जाना होगा।"**** उसकी आँखों में डर था, और आवाज़ काँप रही थी।
आरव ने आगे बढ़कर उसे रोकने की कोशिश की।
"अगर यह इतना ही ख़तरनाक है, तो मुझे बताओ। मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ!"
सिया ने गहरी सांस ली, जैसे कुछ कहना चाहती हो, लेकिन तभी…
पीछे से कुछ कदमों की आवाज़ आई। कुछ
लोग उनकी ओर बढ़ रहे थे। सिया का चेहरा डर से सफ़ेद
पड़ गया।
"वे लोग आ गए… आरव, हमें भागना होगा!"
सिया ने बिना सोचे-समझे आरव का हाथ पकड़ा और उसे तेज़ी से
सड़क की ओर खींचा। एक टैक्सी उनकी ओर आ रही थी, और जैसे ही उसने ब्रेक लगाया, दोनों दौड़कर उसमें बैठ गए।
"ड्राइवर, जल्दी
चलो!" सिया ने घबराई हुई आवाज़ में कहा।
आरव अब तक पूरी तरह समझ नहीं पा रहा था कि हो क्या रहा है, लेकिन
सिया की आँखों में छिपे डर ने उसे एहसास दिला दिया था कि यह सिर्फ़ कोई मामूली
परेशानी नहीं थी।
जैसे ही टैक्सी तेज़ी से आगे बढ़ी, सिया ने
उसकी ओर देखा और कहा—
"ये लोग मुझे मार डालेंगे, आरव! मैंने उनके काले धंधे के राज़ जान लिए हैं।"
आरव समझ चुका था कि इसके पीछे एक
बहुत बड़ी साज़िश है। उसने सिया को अपने पेंटहाउस में छिपा दिया। जो मुंबई की सबसे सुरक्षित और लग्ज़री लोकेशन्स में से एक
था, जहाँ बाहरी लोगों का आना-जाना आसान नहीं था। लेकिन आरव
के लिए यह फैसला सिर्फ़ सिया की सुरक्षा का नहीं था—अब यह उसका अपना मिशन बन चुका था।
सिया ने पहली बार किसी पर इतना भरोसा किया था। आरव की
ज़िंदगी अब तक सिर्फ़ बिज़नेस, लॉजिक और सक्सेस के इर्द-गिर्द घूमती थी, लेकिन सिया की हिम्मत, दर्द और संघर्ष ने उसे अंदर तक झकझोर दिया था। वह महसूस कर सकता था कि यह लड़की सिर्फ़ खुद के लिए नहीं, बल्कि कई मासूम ज़िंदगियों को बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी, जो इस अंधेरे जाल में फँसी थीं।
धीरे-धीरे, दोनों के बीच एक अजीब सा रिश्ता बनने लगा।
"तुम्हें मुझ पर इतना भरोसा क्यों है?" एक
दिन सिया ने उससे पूछा।
आरव ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—"क्योंकि
तुम सही चीज़ के लिए लड़ रही हो। और जब से मैं तुम्हें मिला हूँ, मुझे पहली बार ऐसा लग रहा है कि मेरी लाइफ में सिर्फ़ बिज़नेस से कुछ
ज्यादा भी मायने रखता है।"
सिया चुप हो गई। उसने पहली बार किसी को अपनी लड़ाई में साथ
खड़ा पाया था।
यह कहानी सिया के अतीत में छिपा एक राज़ था, जिसे जानना बहुत ज़रूरी था।
आरव जानता था कि अब वह सिया को अकेला नहीं छोड़ सकता। उसने अपने पर्सनल सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स और लॉयर्स से बात की और फैसला किया कि वह सिया को पूरी सुरक्षा देगा और इस नेटवर्क का पर्दाफाश करेगा।
"तुम अब अकेली नहीं हो, सिया। मैं तुम्हारे साथ हूँ।"
सिया की आँखों में पहली बार राहत की हल्की झलक दिखी। लेकिन
उनकी ज़िंदगी में एक और बड़ा मोड़ आने वाला था…
एक सुबह, जब आरव उठा, तो उसे सिया घर में कहीं
नहीं मिली। उसके कमरे का दरवाज़ा खुला था,
पर अंदर कोई नहीं था। टेबल पर एक कागज़ रखा था, जिस पर लिखा था—
"मुझे यह लड़ाई खुद लड़नी होगी… मैं तुम्हें
इसमें उलझाना नहीं चाहती, आरव।"
आरव का दिमाग़ एकदम सन्न रह गया।
सिया के अचानक गायब होने के बाद, आरव के लिए हर लम्हा बेचैनी से भरा था। उसने पूरे शहर में उसे ढूँढने की
कोशिश की—कैफे, NGO, पुलिस, अपने
कॉन्टैक्ट्स, हर जगह, लेकिन सिया
का कोई सुराग नहीं मिला।
"आख़िर वो कहाँ गई?"
दिन बीतते गए, लेकिन आरव ने हार नहीं मानी। उसने सिया के NGO
के पुराने साथियों से बात की, और तभी एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई।
"क्या तुम्हें पता है कि सिया कौन है?" NGO के
एक वर्कर ने गहरी आवाज़ में कहा।
आरव ने चौंककर पूछा, "क्या मतलब?"
"सिया एक अनाथ थी। लेकिन जब वह छोटी थी,
तो उसे एक बड़े व्यक्ति ने गोद लिया था— बच्चा डांगा।"
आरव का दिमाग़ घूम गया।
बच्चा डांगा—देश के सबसे ताकतवर लोगों में से एक, जो खुद को
समाजसेवी कहता था, लेकिन असल में उसके तार कई अवैध धंधों से
जुड़े थे।
और अब सिया उसी के ख़िलाफ़ एक अहम गवाह थी।
अब आरव समझ चुका था कि सिया को एक
सोची-समझी साज़िश के तहत गायब किया गया है। उसने
फैसला कर लिया कि वह सिर्फ़ सिया को बचाएगा ही नहीं,
बल्कि इस पूरे माफ़िया नेटवर्क को बेनकाब भी करेगा।
पहला कदम था पुलिस और मीडिया को इन्वॉल्व करना।
आरव ने अपनी पहचान और बिज़नेस नेटवर्क का इस्तेमाल किया।
उसने सीक्रेट
इन्वेस्टिगेटर्स को हायर किया, और जल्दी ही उसे एक गुप्त वेयरहाउस के बारे में पता चला, जहाँ सिया को बंदी बनाकर रखा
गया था।
रात के अंधेरे में, आरव अपने कुछ भरोसेमंद लोगों के साथ
वेयरहाउस पहुँचा। जगह बिल्कुल सुनसान थी, लेकिन अंदर जाने पर उसने जो देखा, उससे उसका खून खौल उठा। सिया रस्सियों से बंधी हुई थी, और उसके
सामने बच्चा डांगा खड़ा था।
"अगर सिया की जान चाहते हो, तो यहाँ से चले जाओ। वरना तुम भी जिंदा नहीं बचोगे," बच्चा डांगा ने धमकी भरे लहज़े में कहा।
लेकिन इस बार आरव पीछे हटने के लिए नहीं आया था।
"तुम जैसे लोग हमेशा सोचते हो कि
तुम्हारा सच कभी बाहर नहीं आएगा। लेकिन अब सबको पता चलेगा कि तुम असल में कौन
हो!"
आरव ने अपने सिक्योरिटी गार्ड्स और पुलिस को पहले ही तैयार रखा था। जैसे ही उसने इशारा किया, पुलिस
ने वेयरहाउस पर धावा बोल दिया। गोलियाँ चलने लगीं, लोग भागने लगे। इसी बीच, आरव
ने दौड़कर सिया को रस्सियों से आज़ाद किया। सिया की आँखों में आंसू थे—डर और
राहत के मिले-जुले एहसास के साथ।
"मैंने सोचा था कि अब कभी बच नहीं
पाऊँगी…" सिया ने कांपती आवाज़ में कहा।
आरव ने उसकी तरफ़ देखा और मुस्कुराया—"तुम्हारी
लड़ाई अब मेरी भी है।"
बच्चा डांगा और उसके गुर्गों को पुलिस ने गिरफ़्तार
कर लिया। पूरा माफ़िया नेटवर्क उजागर हो गया।
अब सिया सिर्फ़ एक भागती हुई लड़की नहीं थी—वह एक फाइटर थी, जिसने अपने हौसले से अंधेरे को हराया।
और आरव?
अब वह सिर्फ़ एक बिज़नेस टायकून नहीं था—वह सिया की
कहानी का सबसे अहम हिस्सा बन चुका था।

एक दिन, आरव ने समुद्र किनारे बैठे हुए
सिया से पूछा— "अब आगे
क्या?"
सिया ने उसकी तरफ़ देखा, उसकी आँखों में वो गहराई थी जो समंदर से भी ज्यादा गहरी थी। आरव ने हल्की मुस्कान के साथ आगे कहा— "क्या हम दोनों की राहें एक हो सकती हैं?"
ये सवाल उसके लिए आसान नहीं था। आरव, जिसने कभी
किसी भी चीज़ को दिल से महसूस नहीं किया था,
अब वो सिया के बिना अपनी ज़िंदगी की कल्पना भी नहीं कर पा रहा था। सिया
चुप रही। कुछ देर बाद, हल्की मुस्कान के साथ उसने कहा—
"अंजानी राहें ही तो हमें हमारा सच
दिखाती हैं, आरव…"
उसकी आँखों में अब डर की जगह सपने थे।
आरव ने सिया की ओर हाथ बढ़ाया। इस बार सिया ने बिना किसी
झिझक के उसका हाथ थाम लिया।
दो दिल जो एक अजनबी मुलाकात से जुड़े थे, अब एक नई
कहानी लिखने जा रहे थे—एक ऐसी कहानी, जिसमें प्यार, भरोसा और ज़िंदगी को खुलकर जीने की आज़ादी थी।
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