एक बने और नेक बने

 

                                                        

एक बने और नेक बने


मंजिल का पता मालूम मुझे
,

पर राह से हम अनजान है।

भटक न जाएँ राह कहीं हम,

यह सोंच के हम परेशान हैं।

 

दिल में जगी है एक ललक,

हर हाल में मंजिल पाना है।

प्रयोग करें खुद के जीवन में,

जो मर्म अभी तक जाना है।

 

बन पथिक चलें उस पथ पर,

जो पथ निश्चय ही आसान है।

भटक न जाएँ राह कहीं हम,

यह सोंच के हम परेशान हैं।

 

झूठी कसमें और झूठे वादे,

करके पलभर खुश हो लेंगे।

जीतेंगे जब सच का पथ हम

चलकर, हार गले में ले लेंगे।

 

एक बनें और, नेक बने हम,

सबके चेहरे पर मुस्कान हो।

भटक न जाएँ राह कहीं हम,

यह सोंच के हम परेशान हैं।

 


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