एक घने जंगल में किसी पेड़ पर कुछ चिड़ियाँ रहती थीं।
उनके बीच मुनिया नाम की एक चतुर चिड़िया भी थी। एक दिन एक धूर्त बिल्ली ने उसे
पकड़ने की योजना बनाई। उसने प्यासा होने का बहाना करके पानी के लिए मुनिया से मदद
मांगी। मुनिया समझ गई कि यह बिल्ली पानी के बहाने से मुझे फंसाना चाहती है, फिर भी
वह उसे पानी पिलाना चाहती थी। तभी उसे अपनी माँ की कही वह बातें याद आती है, “किसी
जरूरतमंद को जरूरत के समय उसकी मदद अवश्य करनी चाहिए। परन्तु उससे पहले उस वक्त की
स्तिथि का अंदाजा जरूर लगाना चाहिए कि कहीं किसी प्रकार की कोई समस्या तो नहीं आ
सकती है। अगर किसी समस्या का आभास हो जाये तो डरने की बजाय समझदारी से काम लेनी
चाहिए।"
मुनिया पेड़ के पास ही एक गड्ढे के समीप पानी का
एक घड़ा देखती है। वह बिल्ली को वहाँ बुलाती है। जैसे ही बिल्ली गड्ढे के पास जाती
है मुनिया अपने पंखों के जोड़ से घड़ा के पानी को गड्ढे में गिरा देती है। बिल्ली मुनिया को पकड़ने के फेर में गड्ढे
में गिर जाती है। मुनिया उड़कर बच जाती है और बाकी जानवरों को भी चेतावनी देती है।
सीख: मुश्किल वक्त
में होशियारी से काम लेना चाहिए।


Do leave your comment.