हमारी नजरों से देख लो तुम,
नया सवेरा दिखाई देगा।
जब चाँदनी छा गई हो नभ में,
कहाँ अँधेरा दिखाई देगा।
बेशक ऊँचाई को छू लो जितनी,
कदम जमीं पर न डगमगाए।
अगर डिगे कभी कदम तुम्हारे,
नहीं बसेरा दिखाई देगा।
कदम जमीं पर न डगमगाए।
अगर डिगे कभी कदम तुम्हारे,
नहीं बसेरा दिखाई देगा।
घना कुहासा भी छँट गया है,
नजर सामने सब आ रहा है।
कभी ये झोंका जो तेज चलता,
पवन थपेड़ा सुनाई देगा।
जब चाँद चमकेगा बादलों में,
वह रात रंगीन हो रहेगी।
जहाँ भी गुंजन भ्रमर करेगा,
सुमन हमेशा दिखाई देगा।
निगाहों से जब मिली निगाहें,
कभी निगाहें जो फेर लो तुम।
किसी निगाहों में खोट हो तब,
तपिश घनेरा गवाही देगा।


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