उम्मीद की किरण

                                       

अँधियारों के बीच कहीं एक,
पतली सी किरण लहराई है।
जाग उठा है सोया हुआ मन,
और यौवन ने ली अंगराई है।

मन ही मन, मैंने ठान लिया,
फिर से अतीत नहीं दुहराना।
चाहे भविष्य न उज्जवल हो,
भँवरा बन कर नहीं मडराना।

साथ छोड़ दें यदि अपने भी,
चाहे जीवन में ही तन्हाई हो।
अँधियारों के बीच कहीं एक,
पतली सी किरण लहराई है।

लाख जतन कर ले फिर भी,
मुश्किल में नहीं संभल पाएँ।
हार मान कर नहीं बैठेंगे हम,
बेशक ही प्राण निकल जाएँ।

गुजरा वक्त नहीं आए कभी,
अब गुजर चुका तरूणाई है।
अँधियारों के बीच कहीं एक,
पतली सी किरण लहराई है।

नव विहान में विहग वृंद के,
कलरव ध्वनि गूँज सुनाई दे।
झाड़ी के झुरमुट से छनकर,
कोई मधुरिम गीत सुनाई दे।

तब हर्षित होता उदास मन,
जब बहती बयार पुरवाई है।
अँधियारों के बीच कहीं एक,
पतली सी किरण लहराई है 

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