हमसे सीमा की बात न पूछो,
हम तो सीमा पर ही रहते हैं।
आँधी, तूफान, वर्षा या धूप हो,
हम सभी थपेड़े को सहते हैं।
तापमान हो यदि शून्य कभी,
हम वहाँ भी खुले में रहते हैं।
घुटनों तक जब बर्फ जमी हो,
हम उसपर भी चलते रहते हैं।
सर्द हवाओं के झोंके भी हमें,
कभी पथ से डिगा न पाती है।
विपदा बेशक, बड़ी हो जितनी ,
हौसला कभी तोड़ न पाती है।
हम देश की सीमा के रक्षक हैं,
अपनी जान से ज्यादा प्यारी है।
कर्तव्य के पथ पर अडिग रहते,
यह धरती भी माँ तो हमारी है।
इसकी रक्षा हम करेंगे सदा ही,
जबतक प्राण हमारे बदन में है।
जान भले चले जाए मगर मेरी,
सम्मान न कम हो जो मन में है।
यदि सुहाग की सेज पर बैठे हैं,
और फोन हमारा बज उठता है।
कर्तव्य के पथ हम चल पड़ते हैं,
चाहे सुहाग भले कोई मिटता है।
नवविवाहिता नारी हो कोई वह,
या एक पुत्र वाली वह माता हो।
जिस धरती पर मैंने जन्म लिया,
उस धरा से ही अपना नाता हो।
संकोच हमारे मन में कभी नहीं
होता, हमने क्यों वर्दी पहना है।
मातृभूमि पर मर मिट जाना ही,
हम सैनिकों का सुंदर गहना है।
सभी सैनिकों की एक चाह है,
तिरंगा में लिपटकर घर जाएँ।
सो जाएँ उस माँ की गोद हम,
यदि साँस रहे, कुछ कर जाएँ।


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