क्यों बैठी हो खामोश प्रिय,
इस सूने गलियारे में।
तेरे गोद का नन्हा बालक,
भटक रहा चौबारे में।
आनंद खुशी का कैसे हो भला,
जब गम का साया साथ में हो।
जहाँ भी गम हो, खुशी वहीं है
बिन गम खुशी की बात न हो।
चाहे ढेरों गम आए जीवन में ,
पर जीवन डूबे न अंधियारे में।
साथी जो साथ सदा देता है,
जीवन भर साथ निभाता है।
अहसास तभी होता उसका,
जब दूर कभी चला जाता है।
भान नहीं साए का होता है,
जब, हो जीवन उजियारे में।
करनी का फल मिल जाता है,
फल देता भी वही विधाता है।
कथनी कभी याद रहे नहीं पर,
करनी तो आभास कराता है।
धन सब बँट जाता है लेकिन,
मन मलिन होता है बँटवारे में।
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